वो बच्ची उसी कमरेमें रहती थी
छोटा सा कमरा बहुत अद्भुत था
न भूख, न प्यास
बस नींद और बहुत सारे सपने
और सपनों में होती थी
सिर्फ इर्द-गिर्द डोलती बहुत सी
बातुनी रंग-बिरंगी तितलियाँ
बच्ची सचमुच बच्ची थी
तितलियाँ कहती
बहुत सुन्दर होते हैं
फूल, पत्ते, झरने, पहाड़, नीला आसमान,
तैरते हुए सफ़ेद बादल
और न दिखने वाली हवा
बच्ची हँस पड़ती
इस कमरे से सुन्दर कुछ नहीं
तितलियाँ ने कहा
इस कमरे के बाहरआँगन है,
खेत हैं, तालाब हैं,सडकें
और दूर तक फैले हुए
मैदान भी हैं
तुम्हारा कमरा तो बहुत छोटा है
बच्ची गुस्सा हुई
इस कमरे से सुन्दर कुछ नहीं
तितलियों ने फिर कहा
इस कमरे के बाहर माँ है
तुम्हारी माँ
ये कमरा भी तो उसी का है
‘माँ’
बच्ची को यह शब्दअलग लगा
छोटा सा, अपना सा, प्यारा सा ...
फिर उसे कमरा छोटा लगने लगा
बच्ची ने कहा वो
माँ से मिलना चाहती है
उसे देखना चाहती है
कैसी होती है माँ
तितलियों खुश हो गई
फिर कई दिनों तक
उसके सपने में
तितलियाँ नहीं आई
आई तो सिर्फ माँ
बच्ची ने माँ की सूरत
बना ली
और अब वो खुद बातुनी हो गई
उससे बातें करती और
कहती माँ
मुझे इस कमरे से ले जाओ
मैं तुम्हें देखना और छूना चाहती हूँ....
पर
एक दिन तितलियाँ दोबारा उसके
सपने में आई
उदास, बेहद उदास तितलियाँ
बच्ची ने कहा
तुमने मेरी माँ को देखा है
तितलियाँ चुप रही
कैसी है वो
तितलियाँ चुप रही
तितलियाँ उसके इर्द-गिर्द चक्कर
लगाकर चुपचाप लौट गई
बच्ची की आँख खुली
वो चिल्लाई
माँ मुझे बचाओ
मेरे कमरे की दीवारों से खून गिर रहा है
और बहुत सी छुरियाँ और
तलवारें मेरे कमरे को काट रही हैं
मुझे बचाओ माँ ..........

छोटा सा कमरा बहुत अद्भुत था
न भूख, न प्यास
बस नींद और बहुत सारे सपने
और सपनों में होती थी
सिर्फ इर्द-गिर्द डोलती बहुत सी
बातुनी रंग-बिरंगी तितलियाँ
बच्ची सचमुच बच्ची थी
तितलियाँ कहती
बहुत सुन्दर होते हैं
फूल, पत्ते, झरने, पहाड़, नीला आसमान,
तैरते हुए सफ़ेद बादल
और न दिखने वाली हवा
बच्ची हँस पड़ती
इस कमरे से सुन्दर कुछ नहीं
तितलियाँ ने कहा
इस कमरे के बाहरआँगन है,
खेत हैं, तालाब हैं,सडकें
और दूर तक फैले हुए
मैदान भी हैं
तुम्हारा कमरा तो बहुत छोटा है
बच्ची गुस्सा हुई
इस कमरे से सुन्दर कुछ नहीं
तितलियों ने फिर कहा
इस कमरे के बाहर माँ है
तुम्हारी माँ
ये कमरा भी तो उसी का है
‘माँ’
बच्ची को यह शब्दअलग लगा
छोटा सा, अपना सा, प्यारा सा ...
फिर उसे कमरा छोटा लगने लगा
बच्ची ने कहा वो
माँ से मिलना चाहती है
उसे देखना चाहती है
कैसी होती है माँ
तितलियों खुश हो गई
फिर कई दिनों तक
उसके सपने में
तितलियाँ नहीं आई
आई तो सिर्फ माँ
बच्ची ने माँ की सूरत
बना ली
और अब वो खुद बातुनी हो गई
उससे बातें करती और
कहती माँ
मुझे इस कमरे से ले जाओ
मैं तुम्हें देखना और छूना चाहती हूँ....
पर
एक दिन तितलियाँ दोबारा उसके
सपने में आई
उदास, बेहद उदास तितलियाँ
बच्ची ने कहा
तुमने मेरी माँ को देखा है
तितलियाँ चुप रही
कैसी है वो
तितलियाँ चुप रही
तितलियाँ उसके इर्द-गिर्द चक्कर
लगाकर चुपचाप लौट गई
बच्ची की आँख खुली
वो चिल्लाई
माँ मुझे बचाओ
मेरे कमरे की दीवारों से खून गिर रहा है
और बहुत सी छुरियाँ और
तलवारें मेरे कमरे को काट रही हैं
मुझे बचाओ माँ ..........

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