Saturday, March 14, 2015

मजा ही कुछ और है

दांतों से नाखून काटने का
छोटों को जबरदस्ती डांटने का
पैसे वालों को गाली बकने का
मूंगफली से ठेले से मूंगफली चखने का
कुर्सी पे बैठ कर कान में पैन डालने का
और रोडवेज की बस की सीट में से स्पंज निकालने का
मज़ा ही कुछ और है....

एक ही खूंटी पर ढेर सारे कपड़े टांगने का
नये साल पर दुकानदार से कलैंडर मांगने का
चलती ट्रेन पर चढने का
दूसरे की चिट्ठी पढ़ने का
मांगे हुए स्कूटर को तेज भागाने का
और नींद न आने पर पत्नी को जगाने का
मज़ा ही कुछ और है....
चोरी से फल फूल तोड़ने का
खराब ट्यूब लाइट और मटके फोड़ने का
पड़ोसिन को घूर-घूर कर देख
कचरा दूसरों के घर के सामने फेंकने का
बाथरूम में बेसुरा गाने का
और
थूक से टिकट चिपकाने का
मज़ा ही कुछ और है....
ऑफिस में देर से आने का
फाइल को जबरदस्ती दबाने का
चाट वाले से फोकट में चटनी डलवाने का
बारात में प्रैस किये हुए कपड़ों को फिर से प्रैस करवाने का
सुसराल में साले से पान मंगवाने का
मज़ा ही कुछ और है.......
भोज में एक सब्जी के लिये दो दोने लगाने का
अपना सबसे फटा नोट आरती में चढ़ाने का
दूसरों के मोबाइल से चिपकने का
पान और गुटके को इधर-उधर पिचकने का
कमजोर से बेमतलब लड़ने का
और पत्नी को रोज-रोज परेशान करने का
मज़ा ही कुछ और है....
चेतावनी:- आखिरी वाला मजा अपनी रिसक पर ले ।

No comments:

Post a Comment