Monday, March 23, 2015

हमारी संस्कृति हमारी विरासत

हमारी संस्कृति हमारी विरासत
जिस तरह जनवरी अंग्रेज़ी का पहला महीना है,
उसी तरह हिन्दी महीनों में चैत वर्ष का पहला महीना होता है..
हम इसे कुछ इस तरह से समझ सकते हैं :-
मार्च-अप्रैल चैत्र (चैत)
अप्रैल-मई वैशाख (वैसाख)
मई-जून ज्येष्ठ (जेठ)
जून-जुलाई आषाढ़ (आसाढ़)
जुलाई-अगस्त श्रावण (सावन)
अगस्त-सितम्बर भाद्रपद (भादो)
सितम्बर-अक्टूबर अश्विन (क्वार)
अक्टूबर-नवम्बर कार्तिक (कातिक)
नवम्बर-दिसम्बर मार्गशीर्ष (अगहन)
दिसम्बर-जनवरी पौष (पूस)
जनवरी-फरवरी माघ (माह)
फरवरी-मार्च फाल्गुन (फागुन)

अंग्रेजी नववर्ष मनायें, परंतु भारतीय नववर्ष भी ज़रूर मनाऐं..

इस कविता को भी याद रखना चाहिए

अँग्रेजी सन को अपनाया,
विक्रम संवत भुला दिया है
अपनी संस्कृति, अपना गौरव
हमने सब कुछ लुटा दिया है...
जनवरी-फरवरी अक्षर-अक्षर
बच्चों को हम रटवाते हैं..
मास कौन से हैं संवत के,
किस क्रम से आते-जाते हैं...
व्रत, त्यौहार सभी अपने हम
संवत के अनुसार मनाते हैं...
पर जब संवतसर आता है,
घर-आँगन क्यों नहीं सजाते हैं...
माना तन की पराधीनता की बेड़ी तो टूट गई है...
भारत के मन की आज़ादी लेकिन पीछे छूट गई है...
सत्य सनातन पुरखों वाला
वैज्ञानिक संवत अपना है.
क्यों ढोते हम अँग्रेजी केलेंडर को जो दुष्फलदाई सपना है...
अपने आँगन की तुलसी को,
अपने हाथों जला दिया है...
अपनी संस्कृति, अपना गौरव,
हमने सब कुछ लुटा दिया है...
सर्वश्रेष्ठ है संवत अपना
हमको इसका ज्ञान नहीं हैं...
अँग्रेजी सन को अपनाया,
विक्रम संवत भुला दिया है...
अपनी संस्कृति, अपना गौरव
हमने सब कुछ लुटा दिया है...

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