Monday, March 23, 2015

देशद्रोही.................

देशद्रोही अपने ही हैं सदियों से लूटते आए हैं
चोर उच्चके और गुंडे नेता बनकर छाए हैं||1||

बचे कमीने दफ़्तर में दलाल बन कर छाए है
नीच कर्म भारत में अधिकारी बन लूट मचाए है||2||

क्या क्या करू इनकी तारीफ़ सभी मिले गद्दार है
केवल रोए माथा पकड़ कर नित ग़रीब लाचार है ||3||

सोम कहे देशभक्तो गद्दारों के जुल्मों पर गोर करो
गलियो में नहीं खून बहेगा ऐसा अब नित शोर करो||4||

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