Saturday, March 21, 2015

वो नन्हा , प्यारा सा बचपन मेरा

वो नन्हा , प्यारा सा बचपन मेरा
                     करता मुझे आकर्षित
            फूलो की सुगंध सी भूतपूर्व कल्पना
                       है दृष्टी अवलोकित

हरे - भरे खेतो की पगडंडी पर आना - जाना ।
इंद्रधनुष सी तितलीयों संग धमा - चोकड़ी मचाना ।
एक मनोहर मुस्कान संग फूलो का सहलाना ।
ढूँढना पागलो सा कोयल के गीतों को , जो मन को भाता ।।

             वो नन्हा , प्यारा सा बचपन मेरा
                     है दृष्टी अवलोकित

पेड़ो के पीड़ित डाल पर मित्रों संग उछल - कूद मचाना ।
नदी किनारे बैठ गोपियो का मख़ौल उड़ाना ।
तंग करने वालों को गीतों का रसपान कराना ।
घंनघोर बादल ,वर्षा संग हर्षित हो;नृत्य का आनंद उठाना ।
वर्षा भरित आँगन जल में कागज का नाव चलाना ।।


               वो नन्हा , प्यारा सा बचपन मेरा

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