Monday, March 23, 2015

डर जिधर देखो उधर डर

डर
डर
इधर है
उधर है
नगर नगर
डगर डगर
जिधर देखो
उधर डर है
जीवन क्षणभंगुर है
मगर डर निरंतर है
डर
तन मन जिगर के अन्दर है
घर के अन्दर, घर के बाहर है
खंजर सा सिर के ऊपर है
नीचे जमीं पर अजगर है
डर
जो डरा वह जेल के अन्दर है
जो निडर है देश का लीडर है
पर उसे भी डर जाने का डर है
हर कहीं डरता डराता डर है
डर
खुद से ही डरा हुआ डर है
डरने का भी उसे डर है
पर
जो डराए वो सिकंदर है
डर जाये चुकंदर है
डर
बारूद भरा ट्रांसमीटर है
फटा हुआ गैस सिलंडर है
फूटा हुआ प्रेशर कूकर है
डर
तारीखवार एक कैलेंडर है
प्रथम महायुद्ध का सरेंडर है
द्वितीय महायुद्ध का हिटलर है
तृतीय महायुद्ध में छिपा बबंडर है
डर
फ़िलहाल सट्टे का नंबर है
क्रिकेट में फैंका bouncer है
पर डरता सा अम्पायर है
जैसे डार्विन का इक बन्दर है
डर
बिना पढ़े लफंगा लोफर है
पढ़े लिखे तो डिग्री होल्डर है
unemployed फटीचर है
या सिरफिरा एक अफसर है
डर
निडर है तो वह घर का नौकर है
जिसे झाड़ू पौंछे का चक्कर है
पर होता पूरा शर्कर है
या दिखने में गुड गोबर है
डर
असल में एक अदना आफिसर है
डरा सहमा इनकम टैक्स पेयर है
समय के साथ होता सीनिअर है
अब वह डरने डराने में माहिर है
डर
डाक्टर है तो जहर पिलाता है
बड़ा बिल देकर डकारता है
इंजिनियर है तो फैंका हुआ फर्नीचर है
या फिर दौलत का sky creeper है
डर
यदि निडर है
जेल जाने से
बेफिक्र है
सजा पाने से
तो
डान सा स्मगलर है
या ब्लैक मार्केटियर है
प्ले बॉय का फोटो ग्राफर है
सड़क छाप जेबक्टर है
डर
छोटा बच्चा है
तो दिल का कच्चा है
पर यदि इरादा पक्का है
तो खाता नहीं गच्चा है
कल से ही उसका पेपर है
किन्तु वह बिलकुल निश्फिकर है
पेपर आउट की उसे खबर है
और वह नक़ल चोर पेशेवर है
जेब में रखे चिल्लर है
सामने सिनेमा घर है
दिल में जिसका फिगर है
बस उसी का पिक्चर है
डर
घर घर है
वायरल है
बीवी का खिंचा तेवर है
कंप कंपता शोहर है
चाहे बैरिस्टर हो या फिर मिनिस्टर हो
या दी लिट प्रोफ़ेसर हो
शेर बब्बर घर के बाहर है
भीगी बिल्ली घर के अन्दर है
डर
गुर्राती बीवी सा टोस्टर है
या फिर सहमा सहमा फीजर है
बढ़ा हुआ सा ब्लड प्रेशर है
या नन्हा सा एकुप्रेसर है
डर
बीवी म्यूजिक डायरेक्टर है
शोहर प्ले बेक सिंगर है
जिन्दगी का स्टंट पिक्चर है
पुरुषार्थ तो मात्र पोस्टर है
डर
गाजर के हलुए में किसा गाजर है
चटनी में पिसे अदरक का असर है
मिर्ची का झोंका है
करेले का टुकड़ा है
डर
एक हाथ में सिल पत्थर है
दूजे में साली का लव लेटर है
उछले बेलन का बम्पर है
जिसकी सर से पक्की टक्कर है
डर
डर के अपने तेवर हैं
होसले इसके नोकर हैं
डर
कभी तो हंटर है
निकालता जो कचूमर है
कभी ये जेवर है
जो बनाता सिंसियर है
डर
यह बड़ा शनिचर है
रखता कड़ी नजर है
लैला के दिल के अन्दर है
मजनू के दम के भीतर है
पर
जो भी हो डर, डर है
डर अजर है, अमर है
बिना डराए जो डरता है
डरने में पहला नंबर है
जो डर डर के डरता है
वही मस्त कलंदर है
जो सिर्फ डराने को डराता है
वह लाल मुंह का बन्दर है!

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