चालाक निगाह, द्वेष भाव, अब भाव पुराने हो गए है,
जनाब। कलयुग है, यहाँ लोग सयाने हो गए है।
आसानी से समझ न पाओ, ऐसे चोला ओढ़ा है,
बात बात में, बात बात को, बात बात से जोड़ा है,
लाल लहू है, फिर भी काले दिल वाले हो गए है,
जनाब। कलयुग है, यहाँ लोग सयाने हो गए है।
कथनी करनी में फर्क बहुत है, जो कह देते, नही करते,
जैसे हाथी के दांत दिखाने और खाने के अलग रहते,
ऊँची ऊँची फेक फांक के, दुनिया के प्यारे हो गए है,
जनाब। कलयुग है, यहाँ लोग सयाने हो गए है।
चिकनी चुपड़ी बातें, प्यार व्यार की बातें, बहुत हुई,
मिस कॉल - विस कॉल, बेतुकी मुलाकातें, बहुत हुई,
अब इंटरनेट के ज़माने में "नो उल्लू बनायिंग"
मगरमच्छ के आंसू, आंसुओं की बरसातें, बहुत हुई।
"आकाश", तेरे ये दोस्त, दुशमन के प्यारे हो गए है,
जनाब। कलयुग है, यहाँ लोग सयाने हो गए है।
- आकाश अरोरा
जनाब। कलयुग है, यहाँ लोग सयाने हो गए है।
आसानी से समझ न पाओ, ऐसे चोला ओढ़ा है,
बात बात में, बात बात को, बात बात से जोड़ा है,
लाल लहू है, फिर भी काले दिल वाले हो गए है,
जनाब। कलयुग है, यहाँ लोग सयाने हो गए है।
कथनी करनी में फर्क बहुत है, जो कह देते, नही करते,
जैसे हाथी के दांत दिखाने और खाने के अलग रहते,
ऊँची ऊँची फेक फांक के, दुनिया के प्यारे हो गए है,
जनाब। कलयुग है, यहाँ लोग सयाने हो गए है।
चिकनी चुपड़ी बातें, प्यार व्यार की बातें, बहुत हुई,
मिस कॉल - विस कॉल, बेतुकी मुलाकातें, बहुत हुई,
अब इंटरनेट के ज़माने में "नो उल्लू बनायिंग"
मगरमच्छ के आंसू, आंसुओं की बरसातें, बहुत हुई।
"आकाश", तेरे ये दोस्त, दुशमन के प्यारे हो गए है,
जनाब। कलयुग है, यहाँ लोग सयाने हो गए है।
- आकाश अरोरा
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