पहली चैत्र विक्रम संवत 2072
आप सभी को नव वर्ष आगमन की बधाई दिन शनिवार ।
:
🚩आंध्र में यह पर्व उगादि नाम से मनाया जाता है।
आप सभी को नव वर्ष आगमन की बधाई दिन शनिवार ।
:
🚩आंध्र में यह पर्व उगादि नाम से मनाया जाता है।
🚩उगादि का अर्थ होता है युग का प्रारंभ, अथवा ब्रहमा की सृष्टि रचना का पहला दिन।
🚩इस प्रतिपदा तिथि को ही जम्मू- कश्मीर में नवरेह,
🚩पंजाब में बैसाखी,
🚩महाराष्ट्र में गुडीपड़वा,
🚩सिंध में चेतीचंड,
🚩केरल में 'विशु',
🚩असम में रोंगली बिहू आदि के रूप में मनाया जाता है।
🚩ईरान में इस तिथि को नौरोज यानी नया वर्ष मनाया जाता है।
:
इसे विक्रम संवत इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसे उज्जैन के महाराज विक्रमादित्य ने विद्वानों से तैयार करवाया था ।
:
इस तिथि का इतिहासिक महत्त्व :
:
1) हमारे राजा श्री राम चंद्र जी का राजतिलक इसी दिन हुआ था ।
:
2) धर्मराज युधिष्ठिर का राजतिलक भी इसी दिन श्रीकृष्ण ने किया था ।
:
3) सिख परंपरा के द्वितीय गुरु अंगददेव का जन्म भी हुआ था।
4) प्राचीन काल में दुनिया भर में चैत्र को ही वर्ष का पहला महीना माना जाता था। आज भी बही-खाते का नवीनीकरण और मंगल कार्य की शुरुआत चैत्र में ही होती है ।
:
5) ज्योतिष विद्या में ग्रह, ऋतु, मास, तिथि एवं पक्ष आदि की गणना भी चैत्र प्रतिपदा से ही की जाती है। चैत्र से ही सूर्य मास के अनुसार मेष राशि की शुरुआत भी मानी गई है ।
:
6) देवी पूजन हेतु नव रात्रे इसी दिन से मनाये जाते हैं ।
:
वैज्ञानिक महत्त्व :
1) इस दिन धरती अपनी धुरी पर दूसरी और झुकने के लिए सीधी होती है और उसका सूर्य के अनुपात में उसका झुकाव 0° होता है । इसे अंग्रेजी में वेरनाल एक्विनॉक्स (Vernal Equinox) कहते हैं ।
:
2) इस तिथि को दिन बड़ा और रात छोटी होना प्रारम्भ होती है और इस तिथि को दोनों लागभग बराबर होते हैं । ऐसा साल में दो बार होता है ।
:
3) इस तिथि को दुनिया के उत्तरी और दक्षिणी महाद्वीपों पर पर्यावरण में बदलाव आते हैं और ऋतुयें बदलती हैं ।
:
Vernal Equinox
Vernal Equinox Local Time
Vernal Equinox Time = 04:14:38
Sunrise = 06:24:32
Sunset = 18:32:34
:
Day Duration = 12 Hours 08 Mins 02 Secs
Previous Day Duration = 12 Hours 06 Mins 18 Secs
Next Day Duration = 12 Hours 09 Mins 45 Secs.
🚩इस प्रतिपदा तिथि को ही जम्मू- कश्मीर में नवरेह,
🚩पंजाब में बैसाखी,
🚩महाराष्ट्र में गुडीपड़वा,
🚩सिंध में चेतीचंड,
🚩केरल में 'विशु',
🚩असम में रोंगली बिहू आदि के रूप में मनाया जाता है।
🚩ईरान में इस तिथि को नौरोज यानी नया वर्ष मनाया जाता है।
:
इसे विक्रम संवत इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसे उज्जैन के महाराज विक्रमादित्य ने विद्वानों से तैयार करवाया था ।
:
इस तिथि का इतिहासिक महत्त्व :
:
1) हमारे राजा श्री राम चंद्र जी का राजतिलक इसी दिन हुआ था ।
:
2) धर्मराज युधिष्ठिर का राजतिलक भी इसी दिन श्रीकृष्ण ने किया था ।
:
3) सिख परंपरा के द्वितीय गुरु अंगददेव का जन्म भी हुआ था।
4) प्राचीन काल में दुनिया भर में चैत्र को ही वर्ष का पहला महीना माना जाता था। आज भी बही-खाते का नवीनीकरण और मंगल कार्य की शुरुआत चैत्र में ही होती है ।
:
5) ज्योतिष विद्या में ग्रह, ऋतु, मास, तिथि एवं पक्ष आदि की गणना भी चैत्र प्रतिपदा से ही की जाती है। चैत्र से ही सूर्य मास के अनुसार मेष राशि की शुरुआत भी मानी गई है ।
:
6) देवी पूजन हेतु नव रात्रे इसी दिन से मनाये जाते हैं ।
:
वैज्ञानिक महत्त्व :
1) इस दिन धरती अपनी धुरी पर दूसरी और झुकने के लिए सीधी होती है और उसका सूर्य के अनुपात में उसका झुकाव 0° होता है । इसे अंग्रेजी में वेरनाल एक्विनॉक्स (Vernal Equinox) कहते हैं ।
:
2) इस तिथि को दिन बड़ा और रात छोटी होना प्रारम्भ होती है और इस तिथि को दोनों लागभग बराबर होते हैं । ऐसा साल में दो बार होता है ।
:
3) इस तिथि को दुनिया के उत्तरी और दक्षिणी महाद्वीपों पर पर्यावरण में बदलाव आते हैं और ऋतुयें बदलती हैं ।
:
Vernal Equinox
Vernal Equinox Local Time
Vernal Equinox Time = 04:14:38
Sunrise = 06:24:32
Sunset = 18:32:34
:
Day Duration = 12 Hours 08 Mins 02 Secs
Previous Day Duration = 12 Hours 06 Mins 18 Secs
Next Day Duration = 12 Hours 09 Mins 45 Secs.
No comments:
Post a Comment